Best 101+ Bhagavad Gita Quotes In Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज के इस जबरदस्त आर्टिकल में आप जानने वाले हो Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi. जो आपको बहुत ज्यादा आएंगे और साथ-साथ आपको बहुत प्रभावित भी करेंगे। श्रीमद्भगवद्गीता के यह उपदेश आपको आपकी जिंदगी के बड़े फैसले लेने में भी मदत मिलेगी। 

श्रीमद्भगवद्गीताभारत का सबसे पवित्र ग्रन्थ है जिससे भारत का हर नागरिक जनता है और उसके उपदेश को अपने जिंदगी में उतरने की कोसिस करते है। यह ग्रन्थ महाभारत युद्ध आरम्भ होने के ठीक पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया वह श्रीमद्भगवदगीता के नाम से प्रसिद्ध है। 

तो चलिए शुरू करते है Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi.

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Bhagavad Gita Quotes In Hindi
Bhagavad Gita Quotes In Hindi

नरक के तीन द्वार होते है, वासना, क्रोध और लालच। ∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को परखती है, उसी प्रकार संकट वीर पुरुषों को।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना, लोभ- लालच बिना एवं निस्वार्थ और निष्पक्ष होकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi
Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है। जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मनुष्य को जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं चाहिए और न ही भाग्य और ईश्वर की इच्छा जैसे बहानों का प्रयोग करना चाहिए।  ∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मनुष्य को अपने कर्मों के संभावित परिणामों से प्राप्त होने वाली विजय या पराजय, लाभ या हानि, प्रसन्नता या दुःख इत्यादि के बारे में सोच कर चिंता से ग्रसित नहीं होना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

Bhagavad Gita Quotes In Hindi
Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कर्म के बिना फल की अभिलाषा करना, व्यक्ति की सबसे बड़ी मूर्खता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

अपकीर्ति मृत्यु से भी बुरी है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

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Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

सफलता जिस ताले में बंद रहती है वह दो चाबियों से खुलती है। एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ संकल्प ।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मानव कल्याण ही भगवत गीता का प्रमुख उद्देश्य है। इसलिए मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते समय मानव कल्याण को प्राथमिकता देना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मनुष्य का मन इन्द्रियों के चक्रव्यूह के कारण भ्रमित रहता है। जो वासना, लालच, आलस्य जैसी बुरी आदतों से ग्रसित हो जाता है। इसलिए मनुष्य का अपने मन एवं आत्मा पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

आत्म-ज्ञान की तलवार से अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को काटकर अलग कर दो। उठो, अनुशाषित रहो।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मनुष्य को अपने धर्म के अनुसार कर्म करना चाहिए।जैसे – विद्यार्थी का धर्म विद्या प्राप्त करना, सैनिक का धर्म देश की रक्षा करना आदि। जिस मानव का जो कर्तव्य है उसे वह कर्तव्य पूर्ण करना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मैं भूतकाल, वर्तमान और भविष्य काल के सभी जीवों को जानता हूं, लेकिन वास्तविकता में मुझे कोई नहीजानता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी किसी को कुछ नही मिलता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

श्रेष्ठ पुरुष को सदैव अपने पद और गरिमा के अनुरूप कार्य करने चाहिए। क्योंकि श्रेष्ठ पुरुष जैसा व्यवहार करेंगे, तो इन्हीं आदर्शों के अनुरूप सामान्य पुरुष भी वैसा ही व्यवहार करेंगे।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो मनुष्य जिस प्रकार से ईश्वर का स्मरण करता है उसी के अनुसार ईश्वर उसे फल देते हैं। कंस ने श्रीकृष्ण को सदैव मृत्यु के लिए स्मरण किया तो श्रीकृष्ण ने भी कंस को मृत्यु प्रदान की। अतः परमात्मा को उसी रूप में स्मरण करना चाहिए जिस रूप में मानव उन्हें पाना चाहता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर और सोना सभी समान हैं।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मेरा तेरा, छोटा बड़ा, अपना पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है∼ श्रीमद्भगवद्गीता

परमात्मा को प्राप्ति के इच्छुक ब्रम्हचर्य का पालन करते है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है, जितना कि मृत होने वाले के लिए जन्म लेना। इसलिए जो अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

वह जो सभी इच्छाएं त्याग देता है और “मैं ” और “मेरा ” की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है उसे शान्ति प्राप्त होती है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे। सम्मानित व्यक्ति के लिए, अपमान मृत्यु से भी बदतर है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

तुम्हारा क्या गया जो तुम रोते हो, तुम क्या लाए थे जो तुमने खो दिया, तुमने क्या पैदा किया था जो नष्ट हो गया, तुमने जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं पर दिया, जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का होगा। क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

धरती पर जिस प्रकार मौसम में बदलाव आता है, उसी प्रकार जीवन में भी सुख-दुख आता जाता रहता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

एक ज्ञानवान व्यक्ति कभी भी कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

इतिहास कहता है कि कल सुख था, विज्ञान कहता है कि कल सुख होगा, लेकिन धर्म कहता है कि, अगर मन सच्चा और दिल अच्छा हो तो हर रोज सुख होगा।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मैं सभी प्राणियों को एक समान रूप से देखता हूं, मेरे लिए ना कोई कम प्रिय है ना ही ज्यादा। लेकिन जो मनुष्य मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते हैं वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में आता हूं।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ, मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ, सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम हूँ।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

जो होने वाला है वो होकर ही रहता है और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता, ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है, उन्हें चिंता कभी नही सताती है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जिस तरह प्रकाश की ज्योति अँधेरे में चमकती है, ठीक उसी प्रकार सत्य भी चमकता है। इसलिए हमेशा सत्य की राह पर चलना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

अपने आपको ईश्वर के प्रति समर्पित कर दो, यही सबसे बड़ा सहारा है। जो कोई भी इस सहारे को पहचान गया है वह डर, चिंता और दुखों से आजाद रहता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

अच्छे कर्म करने के बावजूद भी लोग केवल आपकी बुराइयाँ ही याद रखेंगे, इसलिए लोग क्या कहते हैं इस पर ध्यान मत दो, तुम अपना कर्म करते रहो।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

तुम क्यों व्यर्थ में चिंता करते हो ? तुम क्यों भयभीत होते हो ? कौन तुम्हे मार सकता है ? आत्मा न कभी जन्म लेती है और न ही इसे कोई मार सकता है, ये ही जीवन का अंतिम सत्य है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जब जब इस धरती पर पाप, अहंकार और अधर्म बढ़ेगा। तो उसका विनाश कर धर्म की पुन: स्थापना करने हेतु, मैं अवश्य अवतार लेता रहूंगा।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

हे अर्जुन ! तुम्हारा क्या गया जो तुम रोते हो, तुम क्या लाए थे जो तुमने खो दिया, तुमने क्या पैदा किया था जो नष्ट हो गया, तुमने जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं पर दिया, जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का होगा, क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जीवन न तो भविष्य में है, न अतीत में है, जीवन तो बस इस पल में है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है, जितना कि मरने वाले के लिए जन्म लेना। इसलिए जो अपरिहार्य है, उस पर शोक नही करना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

कोई भी व्यक्ति जो चाहे बन सकता है, यदि वह व्यक्ति एक विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करें।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मैं सभी प्राणियों को एकसमान रूप से देखता हूं, मेरे लिए ना कोई कम प्रिय है ना ही ज्यादा, लेकिन जो मनुष्य मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते है, वो मेरे भीतर रहते है और में उनके जीवन में आता हूं।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है, जैसा वह विश्वास करता है, वैसा वह बन जाता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

हे अर्जुन ! क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है, तब तर्क नष्ट हो जाता है, जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

मेरा तेरा, छोटा बड़ा, अपना पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता न इस लोक में है और न ही परलोक में।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो लोग मन को नियंत्रित नही करते है, उनके लिए वह शत्रु के समान काम करता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

नरक के तीन द्वार होते है, वासना, क्रोध और लालच।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

हे अर्जुन ! हम दोनों ने कई जन्म लिए है, मुझे याद है लेकिन तुम्हें नही।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

हे अर्जुन ! जो कोई भी व्यक्ति जिस किसी भी देवता की पूजा विश्वास के साथ करने की इच्छा रखता है, में उस व्यक्ति का विश्वास उसी देवता में दृढ़ कर देता हूं।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

हे अर्जुन ! मन अशांत है और इसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

वह व्यक्ति जो सभी इच्छाएं त्याग देता है और ‘में’ और ‘मेरा’ की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है, उसे अपार शांति की प्राप्ति होती है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

धरती पर जिस प्रकार मौसम में बदलाव आता है, उसी प्रकार जीवन में भी सुख-दुख आता जाता रहता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

इतिहास कहता है कि कल सुख था, विज्ञान कहता है कि कल सुख होगा, लेकिन धर्म कहता है, अगर मन सच्चा और दिल अच्छा हो तो हर रोज सुख होगा।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो होने वाला है वो होकर ही रहता है, और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता, ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है, उन्हें चिंता कभी नही सताती है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी किसी को कुछ नही मिलता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

जो व्यवहार आपको दूसरों से पसंद ना हो, ऐसा व्यवहार आप दूसरों के साथ भी ना करें।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जब जब इस धरती पर पाप, अहंकार और अधर्म बढ़ेगा, तो उसका विनाश कर पुन: धर्म की स्थापना करने हेतु, में अवश्य अवतार लेता रहूंगा।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

हे अर्जुन ! में भूतकाल, वर्तमान और भविष्यकाल के सभी जीवों को जानता हूं, लेकिन वास्तविकता में कोई मुझे नही जानता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

केवल व्यक्ति का मन ही किसी का मित्र और शत्रु होता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

वह व्यक्ति जो अपनी मृत्यु के समय मुझे याद करते हुए अपना शरीर त्यागता है, वह मेरे धाम को प्राप्त होता है और इसमें कोई शंशय नही है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

अच्छे कर्म करने के बावजूद भी लोग केवल आपकी बुराइयाँ ही याद रखेंगे, इसलिए लोग क्या कहते है इस पर ध्यान मत दो, तुम अपना काम करते रहो।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना लोभ- लालच और निस्वार्थ और निष्पक्ष होकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मानव कल्याण ही भगवत गीता का प्रमुख उद्देश्य है, इसलिए मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते समय मानव कल्याण को प्राथमिकता देना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मनुष्य को जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं चाहिए और न ही भाग्य और ईश्वर की इच्छा जैसे बहानों का प्रयोग करना चाहिए।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

परिवर्तन ही संसार का नियम है, एक पल में हम करोड़ों के मालिक हो जाते है और दुसरे पल ही हमें लगता लगता है की हमारे आप कुछ भी नही है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

अपने आपको भगवान के प्रति समर्पित कर दो, यही सबसे बड़ा सहारा है, जो कोई भी इस सहारे को पहचान गया है वह डर, चिंता और दुखो से आजाद रहता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

न तो यह शरीर तुम्हारा है और न ही तुम इस शरीर के मालिक हो, यह शरीर तत्वों से बना है – आग, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश, एक दिन यह शरीर इन्ही तत्वों में विलीन हो जाएगा।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

तुम क्यों व्यर्थ में चिंता करते हो ? तुम क्यों भयभीत होते हो ? कौन तुम्हे मार सकता है ? आत्मा न कभी जन्म लेती है और न ही इसे कोई मार सकता है, ये ही जीवन का अंतिम सत्य है।∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

काम कोर्ध और लोभ नर्क के तीन द्धार है | | ∼ श्रीमद्भगवद्गीता

कर्म मुझे बांध नहीं सकता क्यों की मेरी कर्म के फल में आसक्ति नहीं है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

हे अर्जुन तू युद्ध भी कर और हर समय में मेरा स्मरण भी कर |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

मनुष्य अपनी वासना के अनुसार ही अगला जन्म पाता है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

यह संसार हर छड़ बदल रहा है और बदलने वाली वस्तु असत्य होती है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

प्रत्येक कर्म को कर्त्तव्य मात्रा समझकर करना चाहिए | स्वरुप से कर्मो का त्याग करने से तो बंधन होता है पर सम्बन्ध न जोड़कर कर्त्तव्य मात्रा समझ कर कर्म करने से मुक्ति होती है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

Best Bhagavad Gita Quotes In Hindi

बाहर का त्याग वास्तव में त्याग नहीं है , भीतर का त्याग ही त्याग है |हमारी कामना , ममता , आसक्ति ही बढ़ने वाले है , संसार नहीं |
अपने लिए कुछ न करने से कर्मो से सम्बन्ध टूट जाता है जिसे निष्काम कर्म कहा जाता है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो भी नए कर्म और उनके संस्कार बनते है वह सब केवल मनुष्य जन्म में ही बनते है ,पशु पक्षी आदि योनियों में नहीं , क्यों की वह योनियां कर्मफल भोगने के लिए ही मिलती हैं |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

सज्जन पुरुष अच्छे आचरण वाले सज्जन पुरुषो में , नीच पुरुष नीच लोगो में ही रहना चाहते है स्वाभाव से पैदा हुई जिसकी जैसी प्रकृति है उस प्रकृति को कोई नहीं छोड़ता |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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दैवीय सम्प्रदा से युक्त पुरुष में भय का सर्वथा आभाव और सबके प्रति प्रेम का भाव होता है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो होने वाला है वो होकर ही रहता है और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता | ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है उन्हें चिंता कभी नहीं सताती |    ∼ श्रीमद्भगवद्गीता

भय , राग द्वेष और आसक्ति से रहित मनुष्य ही इस लोक और परलोक में सुख पाते है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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अहम् भाव ही मनुष्य में भिन्नता करने वाला है ,अहम् भाव न रहने से परमात्मा के साथ भिन्नता का कोई कारण ही नहीं है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

“मैं करता हूँ ” ऐसा भाव उत्पन्न होता है इसको ही ” अहंकार ” कहते है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

साधारण मनुष्य शरीर को व्यापक मानता है , साधक परमात्मा को व्यापक मानता है जैसे शरीर और संसार एक है ऐसे ही स्वयं और परमात्मा एक है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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शास्त्र, वर्ण , आश्रम की मर्यादा के अनुसार जो काम किया जाता है वह ” कार्य ” है और शास्त्र आदि की मर्यादा से विरुद्ध जो काम किया जाता है वह ” अकार्य ” है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जीवन न तो भविष्य में है न अतीत मैं ,जीवन तो बस इस पल मैं है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

निद्रा , भय , चिंता , दुःख , घमंड आदि दोष तो रहेंगे ही , दूर हो ही नहीं सकते ऐसा मानने वाले मनुष्य कायर है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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संसार के सयोग में जो सुख प्रतीत होता है , उसमे दुःख भी मिला रहता है |परन्तु संसार के वियोग से सुख दुःख से अखंड आनंद प्राप्त होता है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

उत्पन्न होने वाली वस्तु तो स्वतः ही मिटती है , जो वस्तु उत्पन्न नहीं होती वह कभी नहीं मिटती |आत्मा अजर अमर है | शरीर नाशवान है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

हे पार्थ तू फल की चिंता मत कर अपना कर्त्तव्य कर्म कर |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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भगवान से ही सब उत्पन्न होता है और भगवान् से ही सबकी चेष्टा हो सही है अर्थात सबके मूल में भगवान् ही है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मैं केवल भगवान् का हूँ और भगवान मेरे है ऐसा मानने मात्रा से भगवान् से सम्बन्ध जुड़ जाता है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जिसके लिए सुख दुःख , मान अपमान सामान है वही सिद्ध पुरुष है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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भय का आभाव , अनन्तःकरण की निर्मलता , तत्ज्ञान के लिए ध्यानयोग में स्थिति , दान , गुरुजन की पूजा , पठन पाठन , अपने धर्म के पालन के लिए कष्ट सहना ये दैवीय सम्प्रदा के लक्षण है | ∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मन , वाणी और कर्म से किसी को भी दुःख न देना , प्रिय भाषण , अपना बुरा करने वाले पर भी क्रोध न करना , चित की चंचलता का आभाव ,∼ श्रीमद्भगवद्गीता

दम्भ , अहंकार , घमंड , क्रोध अज्ञान ये आसुरी सम्प्रदा के लक्षण है∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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दैवीय सम्प्रदा मुक्ति की तरफ और आसुरी सम्प्रदा नार्को की और ले जाने वाली है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

मनुष्य संप्रदाय दो ही तरह के है एक दैवीय सम्प्रदा वाले एक आसुरी सम्प्रदा वाले |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

भगवन अर्जुन से कहते है – तेरा कर्म करने पर अधिकार है कर्म के फल पर नहीं इसलिए तू कर्म के फल की चिंता मत कर और तेरा कर्म न करने में भी आसक्ति न हो |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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हे अर्जुन समता ही योग है सुख दुःख , लाभ हानि , मन अपमान , सर्दी गर्मी सब में सम रह |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

जो  दान बिना  सत्कार के,कुपात्र को  दिया जाता  है वह तमस दान कहलाता  है∼ श्रीमद्भगवद्गीता

“मैं करता हूँ ” ऐसा भाव उत्पन्न होता है इसको ही ” अहंकार ” कहते है |∼ श्रीमद्भगवद्गीता

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